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🏆 Youth Festival 2025–26 – संगीतिका संगीत महाविद्यालय, सीहोर का स्वर्णिम अध्याय.

(Inter District & Inter University Youth Festival 2025–26 – Barkatullah University Bhopal | Classical, Light Music, Tabla, Flute, Group Song) Location: ज्ञान-विज्ञान भवन, बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल  Dates: 12–14 November 2025Event: Inter District Inter University Youth Festival 2025–26Organized by: Department of Higher Education & Youth Welfare, Madhya Pradesh 12 से 14 नवंबर 2025 के मध्य बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय, भोपाल के ज्ञान-विज्ञान भवन में आयोजितInter District & Inter University Youth Festival 2025–26संगीत, संस्कृति एवं युवा प्रतिभाओं के अद्भुत समागम का उत्सव बना—और इस वर्ष इस मंच पर संगीतिका संगीत महाविद्यालय, सीहोर ने जो इतिहास रचा, वह आने वाले वर्षों तक प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। 🌺 परिचय | Introduction Sangeetika Sangeet Mahavidyalaya, Sehore ने Youth Festival 2025–26 में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल चार प्रथम स्थान (First Positions) और दो द्वितीय स्थान (Second Positions) प्राप्त किए।This year marked one of the biggest achievements in the 40+ year history of the institution. इस प्रतियोगिता में मध्यप्रदेश के अनेक विश्वविद्यालयों के श्रेष्ठ कलाकार शामिल हुए, और संगीतिक परिवार का प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। संगीत, जब साधना बन जाता है, तो वह केवल सुरों का प्रवाह नहीं रहता—वह संस्कार, अनुशासन, तपस्या और चरित्र का संवाहक बन जाता है। Sangeetika Sangeet Mahavidyalaya, Sehore, जिसकी स्थापना वर्ष 1980 मेंस्वर्गीय पंडित श्री वासुदेव जी प्रसाद मिश्रा (बड़े गुरुजी) द्वारा की गई थी,आज मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अनेक हिस्सों में अपना सांस्कृतिक प्रभाव स्थापित कर चुका है। बड़े गुरुजी की साधना, परंपरा और शिक्षा को आगे बढ़ाते हुएउनके परम प्रिय शिष्य आदरणीय श्री मांगीलाल जी ठाकुर (गुरुजी) नेइस संस्थान को एक नई पहचान और ऊँचाई प्रदान की। उनके आशीर्वाद, अनुशासन, जीवन–दर्शन और सतत मार्गदर्शन सेसंगीतिका संगीत महाविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अनेक असाधारण उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। आज संगीतिका सीहोर जिले का ही नहीं,बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का एक अग्रणी शास्त्रीय संगीत संस्थान बन चुका है। सीहोर जिले के अधिकांश✔️ सरकारी विद्यालय✔️ निजी विद्यालय✔️ केंद्रीय विद्यालय✔️ आर्मी स्कूल✔️ नेवी एवं एयरफोर्स स्कूल✔️ सांस्कृतिक संस्थानमें संगीतिका के छात्र संगीत शिक्षक, वादक एवं कलाकार के रूप में सेवाएँ दे रहे हैं—यह इस संस्थान की गुणवत्ता का प्रमाण है। 🥇 Youth Festival 2025–26 – संगीतिका का ऐतिहासिक प्रदर्शन इस वर्ष का युवा उत्सव संगीतिक परिवार के लिए असाधारण और अविस्मरणीय सिद्ध हुआ।छात्रों ने कुल चार प्रथम स्थान (First Prizes) और दो द्वितीय स्थान (Second Prizes) प्राप्त करप्रतियोगिता में वर्चस्व स्थापित किया। 🎶 1️⃣ शास्त्रीय गायन – प्रथम पुरस्कार (Classical Vocal – 1st Prize) गायन: सृष्टि सिंह नागदाराग: भीमपलासीतबला: तरुण यादवहारमोनियम: महक वारिवा इस प्रस्तुति में रागदारी, भाव, मींड, तानों एवं लय-नियम का अद्भुत संतुलन देखने को मिला।यह प्रस्तुति निर्णायकों द्वारा सर्वसम्मति से सर्वश्रेष्ठ घोषित की गई…। 🎵 2️⃣ सुगम संगीत – प्रथम पुरस्कार (Sugam Vocal – 1st Prize) गायन: भुवी शर्माग़ज़ल: नासिर काज़मी – “दयार-ए-दिल की रात में…”तबला: तरुण यादवहारमोनियम: सृष्टि सिंह नागदा भुवी की आवाज़ में भाव, नज़ाकत और ग़ज़ल के मीठे ऊतार–चढ़ाव सुनकर निर्णायक मंत्रमुग्ध रह गए।उनकी प्रस्तुति इस प्रतियोगिता का एक भावपूर्ण क्षण बनी। 🪘 3️⃣ तबला वादन – प्रथम पुरस्कार (Tabla Solo – 1st Prize) वादक: तरुण यादवताल: तीनतालहारमोनियम: दिव्यांशु पाटीदार तरुण ने तीनताल में जिस लयकारी, रेला, कायदा, तिहाई एवं नियंत्रण का प्रदर्शन किया,वह अत्यंत प्रभावशाली और उच्च स्तरीय था।उनकी प्रस्तुति युवा उत्सव के श्रेष्ठ वादकों में से एक मानी गई। 👥 4️⃣ समूह गान – प्रथम पुरस्कार (Group Song – 1st Prize) गायक: Daksha Sharma, Sujal Mandloi, Palak Chouhan,Mahak Wariwa, Srishti Singh Nagda, Bhuvi Sharma वाद्य संगत: ढोलक – मधुर सक्सेना तबला – तरुण यादव बांसुरी – अंश पाटीदार हारमोनियम – सृष्टि सिंह नागदा गीत की शुरुआत “वन्दे मातरम्…” से हुई, जो वातावरण को पवित्र और ऊर्जावान बनाती है।टीम की एकता, स्वर-संतुलन, हार्मनी और देशभक्ति ने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया। 🌺 5️⃣ बांसुरी वादन – द्वितीय स्थान (Flute – 2nd Prize) वादक: महक वारिवाराग: हंसध्वनिगत: मसीतखानी एवं द्रुत राजाखानीताल: रूपक महक की बांसुरी से निकली निर्मल ध्वनि और राग की पवित्रता ने सभी को प्रभावित किया।उनकी प्रस्तुति अत्यंत सुंदर, सटीक और भावपूर्ण थी। 🎸 6️⃣ वेस्टर्न ग्रुप – द्वितीय स्थान (Western Group – 2nd Prize) 🏅 Overall Summary | संक्षिप्त परिणाम विधा (Category) परिणाम कलाकार Classical Vocal 🥇 1st Srishti Singh Nagda Sugam Sangeet 🥇 1st Bhuvi Sharma Tabla Solo 🥇 1st Tarun Yadav Group Song 🥇 1st Group Team Flute Solo 🥈 2nd Mahak Wariwa Western Group 🥈 2nd Team Total Wins:⭐ 4 First Prizes⭐ 2 Second Prizes यह सफलता सीहोर जिले के लिए भी अत्यंत गौरव का विषय है। 📸 Photography Gallery | फोटो गैलरी 🙏 Guru’s Blessings | गुरुजनों का आशीर्वाद यह उपलब्धियाँ तभी संभव हुईं क्योंकिआदरणीय गुरु श्री मांगीलाल जी ठाकुरने अपने गुरु स्वर्गीय पंडित श्री वासुदेव प्रसाद मिश्रा जी की परंपरा को निष्ठा, प्रेम और तपस्या के साथ आगे बढ़ाया है। उनके चरणों में समर्पण ही संगीतिक परिवार की सबसे बड़ी शक्ति है। 🌐 About Sangeetika Sangeet Mahavidyalaya, Sehore 📌 संगीतिका संगीत महाविद्यालय (स्थापना: 1980)राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर से मान्यता प्राप्तएक अग्रणी शास्त्रीय संगीत संस्थान। संस्था के संस्थापक स्वर्गीय पंडित श्री वासुदेव प्रसाद मिश्रा जी (बड़े गुरुजी) केपरम प्रिय शिष्य श्री मांगीलाल जी ठाकुर (गुरुजी) के मार्गदर्शन मेंमहाविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर असाधारण उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। आज संगीतिका न केवल सीहोर जिले का, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का एक प्रमुख संगीत संस्थान है।इसके सैकड़ों विद्यार्थी Kendriya Vidyalaya, Army, Navy, Airforce, Private Schools में संगीत शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। 👉 Website: https://sangeetikacollege.org/👉 YouTube Channel: https://www.youtube.com/@SangeetikaCollegeOfficial 🎉 Conclusion | समापन Youth Festival 2025–26 में संगीतिक परिवार की यह उपलब्धियाँसाधना, परंपरा, गुरु-शिष्य संबंध और संगीत के प्रति समर्पण का जीवंत प्रमाण हैं। This glorious achievement will inspire future generations of musicians,and mark Sangeetika Sehore as a leading cultural institution of Madhya Pradesh.

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🎶 संगीत में साधना और समर्पण की एक अमर गाथा

स्व. पं. वासुदेव प्रसाद मिश्रा जी को मरणोपरांत “संगीत विद् सम्मान” से सम्मानित किया गया दिनांक: 29 जून 2025 | स्थान: प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, सीहोर सीहोर नगर का हृदय आज गर्व से भर उठा जब संगीतिका संगीत महाविद्यालय के संस्थापक एवं क्षेत्रीय सांस्कृतिक चेतना के अग्रदूत स्व. पंडित श्री वासुदेव प्रसाद जी मिश्रा को मरणोपरांत “संगीत विद् सम्मान – 2025” से अलंकृत किया गया। यह पुरस्कार उनकी जीवन संगिनी श्रीमती पुष्पलता मिश्रा द्वारा मंच पर ग्रहण किया गया। पूरा सभागार उस क्षण भावविभोर हो उठा जब स्व. मिश्रा जी के जीवनवृत्त, योगदान एवं संगीत साधना की स्मृतियों को मंच से साझा किया गया। 🪷 संगीत यात्रा की प्रेरणादायक विरासत पं. वासुदेव प्रसाद मिश्रा जी ने सीहोर नगर को भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुगंध से महकाने में अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने गायन, तबला, बांसुरी, सितार और वादन विधाओं में विद्यार्थियों को शिक्षित कर संगीत में उनकी नींव मजबूत की। उनकी दूरदृष्टि एवं अथक परिश्रम से सीहोर में “संगीतिका संगीत महाविद्यालय” की स्थापना हुई, जो आज भी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा में अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित है। उनका कार्य केवल शिक्षण तक सीमित नहीं रहा – उन्होंने संगीत को जन-जन तक पहुँचाया, अनेक विद्यार्थियों को मंच दिलाया और उन्हें आत्मनिर्भर कलाकार बनाया। 🏆 31वाँ नगर प्रतिभा सम्मान समारोह – 2025 इस गौरवशाली अवसर का आयोजन नवोदित कला मंच, सीहोर एवं जन परिषद, सीहोर द्वारा किया गया।समारोह में मुख्य अतिथि श्रीमती अरुणा राव (समाज सेविका) सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में कुल 43 विद्यार्थियों को कक्षा 10वीं और 27 विद्यार्थियों को कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने पर सम्मानित किया गया। इसके साथ-साथ समाजसेवा, साहित्य, शिक्षा, पत्रकारिता, संगीत, चित्रकला जैसे विविध क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को भी विशेष सम्मान प्रदान किए गए। 🙏 स्मरण और संकल्प कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने पं. मिश्रा जी के जीवन में संगीत के प्रति उनके समर्पण, शुद्धता और गुरु-शिष्य परंपरा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को स्मरण किया।उनका जीवन संदेश था – “संगीत केवल कला नहीं, यह आत्मा की साधना है।” उनकी पुण्य स्मृति में उपस्थित सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं आमंत्रित अतिथियों ने यह संकल्प लिया कि वे स्व. पं. मिश्रा जी के द्वारा दिए गए मूल्यों – साधना, सेवा और संस्कृति – को जीवन में आत्मसात करेंगे। 📸 समारोह के कुछ विशेष क्षण पुरस्कार प्राप्त करते समय श्रीमती पुष्पलता मिश्रा की आँखों में गर्व और विनम्रता दोनों झलक रही थी मुख्य अतिथि द्वारा उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा गया कि – “पं. वासुदेव मिश्रा जी ने न केवल सीहोर, बल्कि पूरे अंचल को संगीत की नई दिशा दी है।”

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उपलब्ध पाठ्यक्रम

प्रवेशिका सर्टिफिकेट इन परफॉर्मिंग आर्ट यह एक दो वर्षीय प्रमाणन पाठ्यक्रम (Certification Course) है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कक्षा 4 उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस कोर्स में तीन प्रमुख विषयों — तबला, गायन, और नृत्य — में से किसी एक को चुना जा सकता है। विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार इस पाठ्यक्रम को नियमित (Regular) या स्वयं-अध्ययन (Private) माध्यम से पूर्ण कर सकते हैं। मार्गदर्शन एवं प्रवेश विद्यार्थियों की रुचि के अनुसार उपयुक्त विषय (गायन, तबला या नृत्य) के चयन में सहयोग प्रदान किया जाता है। प्रवेश प्रक्रिया सरल एवं मार्गदर्शक सहयोग से पूर्ण होती है। पूर्व संगीत ज्ञान आवश्यक नहीं है। मूलभूत प्रशिक्षण प्रत्येक विद्यार्थी को अनुभवी गुरुओं के निर्देशन में सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों रूपों में व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। प्रदर्शन एवं प्रगति मूल्यांकन नियमित मूल्यांकन एवं मंच प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, कला में निपुणता एवं प्रगति का अवसर मिलता है। प्रमाणपत्र एवं भविष्य की दिशा पाठ्यक्रम पूर्ण करने के उपरांत विद्यार्थियों को मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है, जिससे वे डिप्लोमा, स्नातक या उच्चतर संगीत पाठ्यक्रमों में प्रवेश ले सकते हैं। मध्यमा डिप्लोमा इन परफॉर्मिंग आर्ट (M.D.P.A.) यह कोर्स प्रवेशिका (Certificate) के बाद अगला स्तर है, जो दो वर्षों में पूर्ण किया जाने वाला एक मान्यता प्राप्त डिप्लोमा पाठ्यक्रम है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई में ले जाकर उन्हें एक सशक्त कलाकार के रूप में विकसित करना है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 6 उत्तीर्ण) निर्धारित की गई है। इस कोर्स में तीन प्रमुख विषयों — तबला, गायन, और नृत्य — में से किसी एक को चुना जा सकता है। विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार इस पाठ्यक्रम को नियमित (Regular) या स्वयं-अध्ययन (Private) माध्यम से पूर्ण कर सकते हैं। 🔗 विस्तृत पाठ्यक्रम देखने हेतु विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाएं:👉 M.D.P.A. सिलेबस PDF लिंक 🎯 मार्गदर्शन एवं प्रवेश विद्यार्थियों को उनकी रुचि एवं क्षमता के अनुसार उपयुक्त विषय — गायन (Vocal), वाद्य (जैसे तबला), या नृत्य (Classical Dance) — के चयन में मार्गदर्शन दिया जाता है। प्रवेश प्रक्रिया सरल है और इसमें अनुभवी शिक्षकों का पूर्ण सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। इस स्तर पर प्रवेशिका या समकक्ष संगीत ज्ञान होना आवश्यक है। 📚 सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण इस पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को संगीत की गहरी समझ के लिए उच्च स्तर का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। प्रशिक्षण अनुभवी और पारंपरिक शैली से प्रशिक्षित गुरुओं के निर्देशन में दिया जाता है, जिससे विद्यार्थी राग, ताल, प्रस्तुति कौशल एवं मंच अनुशासन में दक्ष हो सकें। 🌟 प्रदर्शन एवं प्रगति मूल्यांकन रचनात्मक प्रस्तुति, नियमित अभ्यास, और निरंतर मूल्यांकन प्रणाली के द्वारा विद्यार्थियों की व्यक्तिगत प्रगति सुनिश्चित की जाती है। इसके अंतर्गत रागों की प्रस्तुति, ताल का प्रयोग, वायवा, एवं संगीत की सैद्धांतिक परीक्षा आयोजित की जाती है। 🏆 प्रमाणपत्र एवं भविष्य की दिशा M.D.P.A. पूर्ण करने के बाद विद्यार्थियों को राज्य संगीत विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त डिप्लोमा प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है, जो उन्हें आगे उच्चतर डिप्लोमा (VID), स्नातक (B.P.A. in Music), अथवा अन्य पेशेवर संगीत पाठ्यक्रमों में प्रवेश की पात्रता देता है। विद डिप्लोमा इन परफॉर्मिंग आर्ट (V.D.P.A.) यह कोर्स मध्यमा डिप्लोमा (M.D.P.A.) के उपरांत अगला स्तर है, जो दो वर्षों में पूर्ण किया जाने वाला एक मान्यता प्राप्त उच्चतर डिप्लोमा पाठ्यक्रम है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की जटिलताओं, विविध शैलियों और प्रस्तुति कौशल में पारंगत बनाना है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कक्षा 6 उत्तीर्ण एवं M.D.P.A. डिप्लोमा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इस कोर्स में भी तीन प्रमुख विषय — तबला, गायन, और नृत्य — में से किसी एक का चयन किया जा सकता है। विद्यार्थी इसे नियमित (Regular) अथवा स्वयं-अध्ययन (Private) माध्यम से पूर्ण कर सकते हैं। 🔗 विस्तृत पाठ्यक्रम देखने हेतु विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाएं:👉 V.D.P.A. सिलेबस PDF लिंक 🎯 मार्गदर्शन एवं प्रवेश विद्यार्थियों को उनकी रुचि, क्षमता, एवं संगीतगत पृष्ठभूमि के आधार पर उपयुक्त विषय चयन में मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। प्रवेश की प्रक्रिया सुगम है तथा इसमें अनुभवी एवं समर्पित संगीत आचार्यों द्वारा पूर्ण सहयोग दिया जाता है। 📚 सैद्धांतिक, व्यावहारिक एवं प्रदर्शनात्मक प्रशिक्षण Vid पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को राग, ताल, बंदिश, धुनों की उन्नत समझ, मंच प्रस्तुति, स्वर, मुद्राएँ, शारीरिक भाव-भंगिमाएँ (Mudras), तथा उत्तर भारतीय एवं कर्नाटकी संगीत शैलियों की प्रारंभिक जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षण अनुभवी गुरुओं द्वारा पारंपरिक एवं आधुनिक दोनों विधियों से कराया जाता है। 🧪 मूल्यांकन पद्धति विद्यार्थियों का मूल्यांकन तीन प्रमुख आधारों पर किया जाता है: सैद्धांतिक परीक्षा (Theory) व्यावहारिक परीक्षा (Practical) प्रस्तुति/डिमॉन्स्ट्रेशन आधारित मूल्यांकन (Demonstration Test) प्रत्येक विद्यार्थी की व्यक्तिगत प्रगति पर निरंतर ध्यान दिया जाता है। 🏆 प्रमाणपत्र एवं भविष्य की दिशा पाठ्यक्रम पूर्ण होने के उपरांत विद्यार्थियों को राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर द्वारा मान्यता प्राप्त V.D.P.A. डिप्लोमा प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। यह प्रमाणपत्र उन्हें आगे स्नातक स्तर (Bachelor in Performing Arts – B.P.A.), मास्टर डिग्री, अथवा अन्य उच्चस्तरीय संगीत पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु पात्र बनाता है। 🎓 बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (B.P.A.) बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (B.P.A.) एक चार वर्षीय नियमित डिग्री पाठ्यक्रम है, जिसे शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में उच्च शिक्षा एवं गहन प्रशिक्षण हेतु तैयार किया गया है। यह कोर्स विद्यार्थियों को न केवल संगीत की व्यावसायिक योग्यता प्रदान करता है, बल्कि उन्हें एक परिपक्व कलाकार एवं शिक्षक के रूप में भी विकसित करता है। इस पाठ्यक्रम में गायन, तबला, कत्थक  विषयों में विशेषज्ञता प्राप्त की जा सकती है। 📌 प्रवेश योग्यताएं इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु विद्यार्थियों को कक्षा 12 उत्तीर्ण (किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से) होना आवश्यक है। यह कोर्स केवल नियमित (Regular) विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध है। 🔗 सिलेबस विवरण पाठ्यक्रम का निर्माण राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय, ग्वालियर द्वारा निर्धारित सिलेबस के अनुसार किया गया है।👉 B.P.A. सिलेबस PDF लिंक देखें 📚 शिक्षण प्रक्रिया एवं प्रशिक्षण B.P.A. में विद्यार्थियों को सैद्धांतिक, व्यावहारिक एवं मंच प्रस्तुति आधारित सम्पूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें शामिल हैं: राग एवं ताल का गहरा अध्ययन रचनात्मक गायन व वादन की तकनीकें उत्तर भारतीय एवं कर्नाटकी संगीत के महत्वपूर्ण स्वरूपों की समझ ताल प्रणाली, आलाप, तन, लयकारी, बंदिशें, पद-अभ्यास, मुद्राएँ (नृत्य हेतु) मंच अनुशासन, प्रस्तुति कौशल एवं समूहिक कार्यक्रमों में भागीदारी

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🎵 सत्र 2025-26 हेतु संगतिका संगीत महाविद्यालय में प्रवेश प्रारंभ

संगतिका संगीत महाविद्यालय, सीहोर में सत्र 2025-26 के लिए नवीन प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। संस्थान में गायन, वादन (तबला) एवं नृत्य विषयों में नियमित कक्षाओं के लिए इच्छुक विद्यार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। यह प्रवेश स्कूल स्तर, स्नातक स्तर (B.P.A.) पर उपलब्ध है। 📚 उपलब्ध विषय 🧑‍🎓 उपलब्ध कोर्स: ✅ पात्रता (Eligibility)              आवश्यक योग्यता (Eligibility Criteria) कोर्स का नाम न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता प्रवेशिका कक्षा 4 उत्तीर्ण माध्यमा / डिप्लोमा कक्षा 6 उत्तीर्ण विद / डिप्लोमा कक्षा 8 उत्तीर्ण स्नातक (B.P.A.) कक्षा 12वीं उत्तीर्ण 📝 आवेदन कैसे करें? इच्छुक विद्यार्थी अब आवेदन कर सकते हैं। सीटें सीमित हैं – इसलिए समय रहते आवेदन करना सुनिश्चित करें। सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑफलाइन या ऑनलाइन माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। 📍 संपर्क करें 📌 संगतिका संगीत महाविद्यालय, सीहोर📞 मोबाइल: 9893204460

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